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Submitted by PatientsEngage on 23 April 2026
Stock pic of a person with a fever patch on forehead and the text overlay in Hindi When to see a doctor for fever

बुखार (ज्वर, फीवर) एक आम लक्षण है। यह आमतौर पर इस बात का संकेत होता है कि शरीर किसी संक्रमण से लड़ रहा है। हमारे लिए यह समझना जरूरी है कि इसे गंभीरता से कब लेना चाहिए। इस लेख में पेशेंटसएन्गैज की टीम आपको बुखार के प्रकार और कारणों को समझने में मदद करती है, और यह भी बताती है कि डॉक्टर से कब मिलना चाहिए।

हम सभी ने अपनी ज़िंदगी में कभी न कभी बुखार का अनुभव किया है। बुखार वास्तव में एक उपयोगी लक्षण है, क्योंकि इस से हमें पता चलता है कि हमारा शरीर किसी अंदरूनी संक्रमण से लड़ रहा है। हमारे शरीर का औसत सामान्य तापमान 98.6° फ़ारेनहाइट (98.6°एफ) यानि कि 37° सेल्सियस (37°सी) होता है। सब लोगों का सामान्य तापमान एक जैसा नहीं होता, लोगों का तापमान इस औसत तापमान से 1°एफ (≈0.6° सी) या उससे ज़्यादा फर्क हो सकता है। साथ ही, हमारा तापमान पूरे दिन ऊपर-नीचे होता रहता है। यह आमतौर पर सुबह के समय कम और शाम के समय ज़्यादा होता है। महिलाओं में मासिक धर्म चक्र के ओव्यूलेशन (अंडोत्सर्ग) चरण के दौरान उनका तापमान ज्यादा होता है। व्यायाम करते समय भी तापमान बढ़ता है। तापमान के ऊपर होने को बुखार तब माना जाता है जब वयस्कों में शरीर का तापमान 100.4°एफ/38ºसी से ज़्यादा हो, और बच्चों में 99.5°एफ/37.5ºसी (मुँह से मापने पर), 99°एफ/37.2ºसी (बगल से मापने पर), या 100.4°एफ/38ºसी (गुदा से मापने पर) से ज़्यादा हो।

बुखार के प्रकार

तापमान में उतार-चढ़ाव के आधार पर:

  • रुक-रुक कर आने वाला बुखार (इंटरमिटेंट बुखार) तब होता है जब तापमान पूरे दिन शरीर के सामान्य तापमान और सामान्य से ज़्यादा तापमान के बीच ऊपर-नीचे होता रहता है।
  • रेमिटेंट बुखार में बुखार पूरे दिन 1°सी से ज़्यादा ऊपर-नीचे होता रहता है, लेकिन यह कभी भी शरीर के सामान्य तापमान के स्तर तक नहीं पहुँचता (यह सामान्य तापमान से ऊपर ही रहता है)।
  • हेक्टिक बुखार तब होता है जब पूरे दिन तापमान में बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव होता है, और दिन के सबसे कम और सबसे ज़्यादा तापमान के बीच कम से कम 2.5°एफ/1.4ºसी का अंतर होता है। हेक्टिक बुखार को रेमिटेंट या इंटरमिटेंट बुखार की स्थिति में भी देखा जा सकता है।
  • लगातार बना रहने बुखार (कंटीन्यूअस बुखार) तब होता है जब शरीर का तापमान पूरे दिन बढ़ा हुआ रहता है, और उसमें बहुत कम उतार-चढ़ाव (<1°सी) होता है।
  • आवर्ती बुखार (रिलैप्सिंग बुखार) यह एक प्रकार का इंटरमिटेंट बुखार है, जिस में शरीर का तापमान सामान्य होने के कुछ दिनों या हफ़्तों बाद फिर से बढ़ जाता है।

कैंसर और बुखार के बीच के संबंध के बारे में यहाँ पढ़ें: https://www.patientsengage.com/conditions/fever-and-cancer

बुखार की अवधि के आधार पर:

  • एक्यूट बुखार अचानक शुरू होता है और इसमें शरीर का तापमान थोड़े समय के लिए बढ़ता है। यह कुछ दिनों तक रहता है, आमतौर पर 7 दिनों तक, जैसे कि वायरल ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण में देखा जाने वाला बुखार।
  • सबएक्यूट बुखार एक लगातार बना रहने वाला, हल्का बुखार होता है जो एक्यूट बुखार से ज़्यादा समय तक रहता है, आमतौर पर 14 दिनों तक, जैसा कि टाइफाइड में देखा जाने वाला बुखार।
  • क्रोनिक बुखार लंबे समय तक रहता है, अक्सर 2 हफ़्तों से ज़्यादा, जैसे कि टीबी, कैंसर, एचआईवी में होने वाला बुखार।

तापमान के स्तर के आधार पर:

  • लो ग्रेड बुखार या हल्का बुखार*तब होता है जब तापमान सामान्य से थोड़ा ज़्यादा होता है, आमतौर पर 99.1°एफ/37.3ºसी और 100.4°एफ/38ºसी के बीच, और यह अक्सर किसी हल्की बीमारी या इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) के सक्रिय होने का संकेत होता है।
  • हाई ग्रेड बुखार या तेज़ बुखार*तब होता है जब तापमान 102.4°एफ/39.1ºसी और 105.8°एफ/41ºसी के बीच होता है, और यह अक्सर इस बात का संकेत होता है कि शरीर किसी बड़े संक्रमण से लड़ रहा है। तेज़ बुखार कुछ वायरल संक्रमणों के कारण भी हो सकता है।

तापमान कैसे मापें?

डिजिटल थर्मामीटर का इस्तेमाल करें। तापमान मापने के लिए थर्मामीटर को मुँह, बगल (अंडरआर्म), या गुदा (रेक्टम) में रखें। बुखार कभी भी हाथ लगाकर न मापें। हाथ शरीर के सटीक तापमान में आए बदलाव को थर्मामीटर की तरह ठीक से नहीं माप सकता, और यह आस-पास के माहौल के तापमान या व्यक्ति के अपने हाथ के तापमान से आसानी से प्रभावित हो जाता है।
गुदा (रेक्टम) से प्राप्त तापमान का माप सबसे सटीक होता है, खासकर एक साल से कम उम्र के बच्चों के लिए। बगल (अंडरआर्म) में थर्मामीटर लगाकर मापा गया तापमान सबसे कम सटीक होता है, लेकिन यह एक सुरक्षित और सुविधाजनक तरीका है। मुँह (ओरल) से मापने का तरीका बड़े बच्चों और वयस्कों के लिए सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

  • मुँह (ओरल) से मापना 5 साल से ज़्यादा उम्र के बच्चों और वयस्कों के लिए सबसे अच्छा तरीका है। थर्मामीटर की नोक को जीभ के नीचे रखें और मुँह बंद कर लें, नाक से साँस लेते रहें। बीप की आवाज़ का इंतज़ार करें, फिर थर्मामीटर निकालकर उसपर तापमान पढ़ें।
  • बगल (काँख, अंडरआर्म, एक्सिलरी मेजर्मेन्ट) में थर्मामीटर लगाने का तरीका सभी उम्र के लोगों के लिए सबसे आसान है, लेकिन यह सबसे कम सटीक है। सुनिश्चित करें कि बगल सूखी हो (मापने से पहले पसीना पोंछ लें)। थर्मामीटर की नोक को बगल में रखें, और यह ध्यान रखें कि थर्मामीटर की नोक त्वचा को छू रही हो। बांह को अपनी छाती के एक तरफ कसकर दबाएं ताकि थर्मामीटर अपनी जगह पर टिका रहे। बीप आने का इंतज़ार करें, फिर थर्मामीटर निकाल कर तापमान का माप देखें।
  • शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए गुदा (रेक्टम) में थर्मामीटर डालकर तापमान मापने को तरीका सबसे अच्छा है, क्योंकि यह सबसे सटीक तरीका है। थर्मामीटर की नोक को गुदा क्षेत्र में रखें और तब तक पकड़े रहें जब तक कि उसमें से बीप की आवाज़ न आ जाए। यह तरीका अक्सर 3 महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए सुझाया जाता है और 5 साल तक के बच्चों के लिए सबसे सटीक माना जाता है।
  • बिना छुए तापमान मापने वाले थर्मामीटर (नो-टच थर्मामीटर) इन्फ्रारेड तकनीक का इस्तेमाल करके कान या माथे के ज़रिए तापमान माप सकते हैं। माथे से तापमान मापने के लिए, थर्मामीटर को माथे के सामने, भौंहों के बीच, त्वचा से लगभग 1-5 cm की दूरी पर सीधा बनाए रखें। थर्मामीटर से त्वचा को मत छूएँ। यह सुनिश्चित कर लें कि माथा साफ़ और सूखा हो, और उस पर बाल, हेडबैंड या टोपी न हो। तापमान को कान से भी मापा जा सकता है। कान से तापमान मापने के लिए, थर्मामीटर की प्रोब का कवर हटा दें और प्रोब को कान की बाहरी नली में डालें। दोनों ही तरीकों में, तापमान जानने के लिए बटन दबाएं; रीडिंग तुरंत आ जाती है।

अलग-अलग तरीकों के बीच का अंतर: गुदा में थर्मामीटर से प्राप्त तापमान मुंह से लिए गए तापमान की तुलना में लगभग 1°एफ (0.6°सी) ज़्यादा होगा। बगल में थर्मामीटर रख कर मापा गया तापमान मुंह से लिए गए तापमान की तुलना में लगभग 1°एफ (0.6°सी) कम होगा।

विधि सटीकता अंदरूनी तापमान से औसतन अंतर सामान्य रीडिंग लाभ संभव समस्याएं
मुँह से मध्यम शरीर के असली अंदरूनी तापमान से लगभग 0.3–0.5°सी / 0.5–0.9°एफ कम ~36.7–37.3°C
(~98.1–99.1°F)
सुविधाजनक और काफी भरोसेमंद हाल में लिए गए भोजन और पेय, या साँस लेने के तरीके से प्रभावित हो सकता है
बगल/कांख सबसे कम शरीर के अंदरूनी तापमान से लगभग 0.5–1.0°सी / 0.9–1.8°एफ कम ~36.0–36.5°C
(~96.8–97.7°F)
बिना शरीर के भीतर किसी उपकरण डाले हुए, आसान कमरे के तापमान से बहुत ज़्यादा प्रभावित होता है; सबसे कम सटीक
गुदा/रेक्टल सबसे ज़्यादा मुँह से लिए तापमान से लगभग 0.3–0.5°सी / 0.5–0.9°एफ ज़्यादा; शरीर के अंदरूनी तापमान के सबसे करीब ~37.0–37.7°C
(~98.6–99.9°F)
शिशुओं के लिए और क्लिनिकल तौर पर सबसे सटीक शरीर के अंदर उपकरण डाल कर किया जाने वाला, लोग शायद इस तरह के तरीके के प्रति सहज न हों

बुखार से जुड़े लक्षण

  • ठंड लगना या कंपकंपी होना
  • पीठ में दर्द या आँखों के पीछे दर्द होना
  • पसीना आना
  • सिरदर्द
  • बदन दर्द
  • थकान
  • निर्जलीकरण होना या चक्कर आना
  • भूख न लगना
  • चेहरा लाल होना/ त्वचा गर्म होना

फ़ेब्राइल सीज़र (बुखार के कारण होने वाला सीज़र) क्या हैं? कुछ बच्चों में सीज़र बुखार का एक साइड इफ़ेक्ट होता है, इस प्रकार के सीज़र को फ़ेब्राइल सीज़र कहते हैं। फ़ेब्राइल सीज़र शरीर के तापमान में तेज़ी से बढ़ोतरी के कारण होता है। तापमान में तेज वृद्धि आमतौर पर किसी वायरल या बैक्टीरियल इन्फ़ेक्शन की वजह से होती है और बच्चे का विकासशील दिमाग़ इस तेज़ बुखार पर प्रतिक्रिया करता है और बच्चे को सीज़र होता है। यह पाँच साल से कम उम्र के 2% से 4% बच्चों में होता है। कुछ सीज़र में शरीर में अनियंत्रित झटके लग सकते हैं; जब ऐसा हो (जो किसी भी सीज़र के मामले में एक आम प्रक्रिया है) तो बच्चे को करवट से लिटा दें, सुरक्षित रखने के लिए उसके सिर को किसी नरम चीज़ पर रखें, और उसके मुँह में कुछ भी न डालें। तुरंत डॉक्टर से मदद लें।

बुखार के कारण

बुखार तब होता है जब हमारा इम्यून सिस्टम (रोग-प्रतिरोधक क्षमता) किसी वायरल, बैक्टीरियल, या किसी अन्य प्रकार के संक्रमण (आमतौर पर कान, गले, त्वचा, किडनी या ब्लैडर में संक्रमण) से लड़ रहा होता है। इम्यून सिस्टम को प्रभावित करने वाली अन्य समस्याओं के कारण भी बुखार हो सकता है:

  • टीकाकरण
  • ऑटोइम्यून बीमारियाँ, जैसे कि रूमेटॉइड अर्थराइटिस या ल्यूपस
  • सूजन से जुड़ी बीमारियाँ, जैसे कि रूमैटिक फ़ीवर
  • न्यूरोलॉजिकल समस्याएँ, जैसे कि दिमाग़ में चोट लगना
  • कुछ प्रकार के कैंसर, जैसे कि हॉजकिन लिंफ़ोमा, नॉन-हॉजकिन लिंफ़ोमा, एक्यूट ल्यूकेमिया, क्रोनिक ल्यूकेमिया, रीनल सेल कार्सिनोमा, लिवर कैंसर (विशेष रूप से जब कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल गया हो), बोन सारकोमा, पैंक्रियाटिक कैंसर।
  • कुछ दवाएँ, जैसे कि कुछ एंटीबायोटिक्स (पेनिसिलिन, सेफ़ालोस्पोरिन और सल्फ़ा दवाएँ), सीज़र के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएँ (जैसे फ़िनाइटोइन), दिल की बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएँ (प्रोकेनामाइड, क्लोनिडाइन), मूत्रवर्धक दवाएँ (डाईयुरेटिक) आदि।

कैंसर और बुखार के बारे में और अधिक जानकारी यहाँ पढ़ें: [https://www.patientsengage.com/conditions/fever-and-cancer]

बुखार के लिए आज़माने लायक घरेलू उपाय

  • ज़्यादातर लोग आराम, तरल पदार्थों के सेवन, और बुखार कम करने वाली दवाओं (पैरासिटामोल और आइबुप्रोफेन) से ठीक हो जाते हैं।
  • जब आपको बुखार हो, तो हल्के कपड़े पहनें ताकि आपके शरीर को ठंडा होने में मदद मिले। अगर आपको कंपकंपी हो रही हो तो आप हल्के कंबल का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन भारी कंबल या कपड़ों की कई परतें पहनने से बचें, क्योंकि इससे गर्मी अंदर ही फंसी रह जाती है और शरीर का तापमान नीचे नहीं आ पाता।
  • मरीज को हवादार कमरे में रखें, जहाँ हल्का पंखा चल रहा हो या एसी का तापमान आरामदायक स्तर पर (लगभग 24-26ºC) हो।
  • कुछ समय के लिए तुरंत राहत के लिए शरीर को ठंडे (सामान्य ठंडा, बर्फ जैसे ठंडा नहीं) पानी में भिगोए गए कपड़े से पोंछें। ठंडे पानी से नहाने से बचें, क्योंकि इससे कंपकंपी हो सकती है और शरीर की गर्मी अंदर ही फंसी रह सकती है।
  • आप माथे पर कूलिंग जेल पैच भी लगा सकते हैं। ये ऊपरी तौर पर ठंडक और आराम का एहसास देते हैं, हालाँकि इनसे शरीर के मुख्य तापमान में कोई बदलाव नहीं आता।
  • पोषण का ध्यान रखना ज़रूरी है। हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन दें—जैसे सूप, शोरबा, दलिया, आदि। ये शरीर के पाचन तंत्र पर बिना ज़ोर डाले व्यक्ति को ऊर्जा देता है।

डॉक्टर से कब मिलें

अगर किसी व्यक्ति को बुखार के साथ-साथ इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो डॉक्टर से ज़रूर मिलना चाहिए:

  • सनबर्न - धूप से त्वचा का जलना
  • सीने में दर्द
  • तेज़ या उथली साँसें
  • साँस लेने में तकलीफ़ या साँस फूलना
  • गाढ़ा पीला/हरा बलगम या खून वाली खाँसी
  • होंठों या उंगलियों के आसपास की त्वचा का रंग बिगाड़ना, नीला या काला पड़ना
  • तेज़ सिरदर्द
  • रोशनी बर्दाश्त न होना - आँखों में चुभन
  • त्वचा पर गंभीर या बढ़ता हुआ रैश/चकत्ते
  • गर्दन में अकड़न
  • भ्रम या उलझन की स्थिति
  • बहुत ज़्यादा उनींदापन - नींद आना
  • चेतना खो देना
  • गंभीर निर्जलीकरण के लक्षण, जैसे मुँह और जीभ का सूखना और उस पर सफ़ेद परत होना, पेशाब कम आना
  • सीजर
  • शरीर का तापमान ≥104°एफ / ≥40ºसी से ज़्यादा होना, और पैरासिटामोल या आइबुप्रोफेन लेने पर भी कम न हो
  • बुखार का 5 दिनों से ज़्यादा समय तक बना रहना
  • लगातार बना रहने वाला हल्का बुखार भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए

शिशुओं के मामले में, इन लक्षणों पर ध्यान दें:

  • 12 हफ़्ते से कम उम्र के शिशुओं में किसी भी तरह का बुखार
  • आँखों का धँसा हुआ लगना, शिशु के सिर के ऊपरी हिस्से पर नरम जगह का होना, या रोते समय आँखों से आँसू न निकलना
  • बुखार के साथ-साथ त्वचा पर ऐसे रैश या बैंगनी धब्बे होना, जो दबाने पर हल्के न पड़ें
  • शरीर का तापमान लगातार 104°एफ/40°सी से ऊपर बना रहना
  • बिना किसी स्पष्ट कारण, जैसे सर्दी या फ़्लू, के बुखार आना
  • बच्चा बहुत सुस्त/बेजान लग रहा हो और/या उसे असामान्य रूप से ज़्यादा नींद आ रही हो या वह चिड़चिड़ा हो
  • सीजर
  • तेज़ और/या उथली साँस

बुज़ुर्गों में बुखार:

बुज़ुर्गों में बुखार होने पर थोड़ी ज़्यादा सावधानी बरतने की ज़रूरत होती है, क्योंकि उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो सकती है, और तापमान में थोड़ी सी भी बढ़ोतरी किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकती है। शरीर में होने वाले छोटे-मोटे बदलावों पर नज़र रखें। बुज़ुर्गों में संक्रमण के लक्षण कभी-कभी अचानक तेज़ बुखार आने के बजाय भ्रम, सुस्ती, भूख न लगना या कमज़ोरी के रूप में पेश होते हैं। उनके सामान्य तापमान से 1–1.5°सी भी ज़्यादा तापमान होना एक गंभीर बात है। शरीर में पानी की कमी न होने देना (निर्जलीकरण से बचना) बहुत ज़रूरी है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में निर्जलीकरण तेज़ी से होती है, जिससे बुखार और भी बिगड़ सकता है। एक साथ ज़्यादा पानी पीने के बजाय, थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार पानी या ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) पीना ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है। बुज़ुर्गों के मामले में हमें ज़्यादा सावधान रहना चाहिए; पैरासिटामोल (एसिटामिनोफेन) आमतौर सबसे सुरक्षित दवा मानी जाती है, लेकिन इसकी खुराक व्यक्ति के गुर्दे और लिवर की स्थिति के अनुसार ही तय की जानी चाहिए। इससे ज़्यादा जटिल मामलों में डॉक्टर की सलाह लेना ज़रूरी है। अगर बुखार 24–48 घंटे से ज़्यादा समय तक बना रहता है, या बुखार के साथ-साथ भ्रम, सीने में दर्द, साँस लेने में तकलीफ़, गंभीर निर्जलीकरण, या बहुत ज़्यादा कमज़ोरी महसूस होती है, तो तुरंत डॉक्टर से जाँच करवानी चाहिए। बुज़ुर्गों के मामले में सबसे ज़रूरी बात यह है कि तापमान पर नज़र रखने के साथ-साथ उनके व्यवहार और संज्ञान में होने वाले बदलावों पर भी ध्यान दिया जाए, क्योंकि ये संकेत अक्सर थर्मामीटर में तापमान बढ़ने से पहले ही दिखाई देने लगते हैं।

डॉक्टर से सलाह लेने में क्या शामिल हो सकता है?

डॉक्टर व्यक्ति के शरीर का तापमान और अन्य ज़रूरी शारीरिक संकेतों (वाइटल)—जैसे ब्लड प्रेशर, साँस लेने की गति और ऑक्सीजन का स्तर—की जाँच करेंगे। वे संक्रमण के किसी भी संकेत का पता लगाने के लिए मरीज़ में दिखाई देने वाले अन्य लक्षणों के बारे में विस्तार से जानकारी लेंगे। इसके बाद कुछ ब्लड टेस्ट (जैसे कम्प्लीट ब्लड काउन्ट, संक्रमण के संकेत बताने वाले सूचक (मार्कर)—सीआरपी/ ईएसआर, मलेरिया एजी, टाइफॉइड के लिए टेस्ट, डेंगू सेरोलोजी, लिवर फ़ंक्शन टेस्ट, यूरिन टेस्ट, ब्लड कल्चर आदि) करवाए जा सकते हैं।

अगर संक्रमण होने का ज़रा भी शक होता है, तो कुछ अतिरिक्त जाँच या इमेजिंग टेस्ट करवाए जा सकते हैं—जैसे छाती का एक्स्-रे (फेफड़ों में संक्रमण का शक होने पर), ओटोस्कोपी (कान में संक्रमण का शक होने पर), या गले/त्वचा पर हुए घावों से सैम्पल लेकर उसका कल्चर करवाना।

बुखार से बचाव कैसे करें?

जैसा कि ऊपर बताया गया है, बुखार तब होता है जब कोई व्यक्ति किसी संक्रमण की चपेट में आ जाता है। इसलिए, बुखार से बचने के लिए संक्रमण से बचना बहुत ज़रूरी है। ऐसा करने के लिए आप ये उपाय अपना सकते हैं:

  • अपने हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोएँ, या हैंड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें।
  • बिना धोए हाथों से अपने चेहरे को छूने से बचें।
  • अपने घर की सतहों—जैसे दरवाज़ों के हैंडल आदि—को नियमित रूप से साफ़ करें और कीटाणुनाशक से पोंछें।
  • संक्रमित लोगों के साथ नज़दीकी संपर्क से बचें।
  • उचित टीकाकरण करवाते रहें।

References

Changed
02/Jun/2026
Condition

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